धरती पर इक चाँद उतरते देखा है पगडंडी से उसे गुज़रते देखा है उसका आँचल जब भी हवा में लहराया मौसम को भी आहें भरते देखा है हाल तो पूछें चल कर हम आईने का आईने मे उसे सँवरते देखा है दिल के जैसी धड़कन है हर पत्थर में जिन राहों से उसे गुज़रते देखा है प्यार बहुत आता है उसकी बातों पर बातों से जब उसे मुकरते देखा है आओ चलकर उससे बातें करते हैं जिससे उसको बातें करते देखा है । सिमट सिमट कर जब वो अदा से चलती है क़दम क़दम पर उसे बिखरते देखा है ।
khaalish roomaani ghazal hai sir. Har manzar khoobsoorat khinchaa hai aapne, Dili daaad qubule'n
धरती पर इक चाँद उतरते देखा है
ReplyDeleteपगडंडी से उसे गुज़रते देखा है
उसका आँचल जब भी हवा में लहराया
मौसम को भी आहें भरते देखा है
हाल तो पूछें चल कर हम आईने का
आईने मे उसे सँवरते देखा है
दिल के जैसी धड़कन है हर पत्थर में
जिन राहों से उसे गुज़रते देखा है
प्यार बहुत आता है उसकी बातों पर
बातों से जब उसे मुकरते देखा है
आओ चलकर उससे बातें करते हैं
जिससे उसको बातें करते देखा है ।
सिमट सिमट कर जब वो अदा से चलती है
क़दम क़दम पर उसे बिखरते देखा है ।
khaalish roomaani ghazal hai sir. Har manzar khoobsoorat khinchaa hai aapne, Dili daaad qubule'n